कोरोना: फ्रांस में एक महीने का लॉकडाउन।

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कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए फ्रांस ने पेरिस समेत कई रीजन में एक महीने के लॉकडाउन का ऐलान किया है. हालांकि, इस दौरान जरूरी सामानों के दुकान और स्कूल खुले रहेंगे. इस बीच स्पेन और इटली ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का इस्तेमाल फिर से शुरू कर दिया है. इस वैक्सीन की वजह से खून का थक्का जमने की कथित खबरों के बाद इसका इस्तेमाल बंद कर दिया गया था.

फ्रांस के प्रधानमंत्री जीन कैस्टेक्स ने गुरुवार को चार हफ्ते के लॉकडाउन का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामले को कम करने के लिए पेरिस समेत 16 रीजन में इस शुक्रवार से चार हफ्ते तक लॉकडाउन लगेगा. इस दौरान स्कूल, जरूरी सामानों के दुकान, बुकस्टोर खुले रहेंगे.

आपको बता दें कि आयरलैंड, नीदरलैंड, नार्वे, डेनमार्क, आइसलैंड, कांगो, बुल्गारिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन ऐसे देश हैं, जिन्होंने अस्थाई रूप से एस्ट्रेजेनेका वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. हालांकि, बाद में इटली और फ्रांस ने रोक को हटाने का फैसला किया था. अब स्पेन ने भी एस्ट्रेजेनेका पर लगी अस्थाई रोक को हटाने का फैसला किया है.

क्यों लगाई गई थी अस्थाई रोक
करीब दो दर्जन यूरोपीय देशों ने पिछले कुछ दिनों के भीतर ही एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर अस्थाई रोक लगा दी थी. दावा था कि इस वैक्सीन के लेने के बाद कुछ लोगों के शरीर में खून के थक्के जम गए थे, जिसका काफी बुरा असर पड़ा था. हालांकि, बाद में दावा किया गया है कि एस्ट्राजेनेका पर लगाया गया बैन सिर्फ एक राजनीतिक फैसला था.

एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड के साथ मिलकर बनाया गया है. ऐसे में यूरोपीय देशों ने ब्रेग्जिट के कारण वैक्सीन पर रोक लगाई, जो राजनीतिक कदम रहा. वैक्सीनेशन के रुकने के बाद यूरोपीय देशों में कई तरह के धड़े बन गए थे, जो इस बैन का विरोध कर रहे थे. इटली ने वैक्सीन पर बैन लगाने के लिए बाकी देशों पर दबाव बनाया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने हासिल किया लक्ष्य
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि पद संभालने से पहले मैंने राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले 100 दिनों में 100 मिलियन वैक्सीन का डोज देने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था. मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हम कल केवल 58 दिनों में उस लक्ष्य तक पहुंच गए हैं.

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