प्रयागराज के माघ मेले से शंकराचार्य स्वामी अविमुकतेशवरा नन्द आज माघ मेला छोड़ कर चले गए वो पिछले 12 दिनों से अपने शिविर के बाहर उसी पालकी मे उसी जगह बैठे रहें जहाँ पुलिस नें स्नान घाट से लाकर उन्हें छोड़ा था.
मेला से जाने से पहले उन्होंने प्रेस कांफ्रेस करके अपना दुख जताया और कहा की कल से एक संत के ज़रिये प्रशासन नें एक प्रस्ताव भेजा था जिसमे उन्होंने कहा था की आप स्नान करने जाए सभी अधिकारी मौजूद रहेंगे आप पर पुष्पा वर्षा होंगी स्वामी अविमुकतेश्वरा नन्द नें कहा की इस प्रस्ताव मे माफ़ी का कोई ज़िक्र नही था अगर हम इसे स्वीकार लेते तो ये हमारे बटुक और संतो के आत्मसम्मान से समझौता होता की हमने इसके बदले ये सुविधा लेली.
मौनी अमावस्या स्नान के दिन से उपजे विवाद के बाद से शांकराचर्या क़ो मानानें की किसी भी स्तर से पहल नही की गई कई राजनितिक और सामाजिक संगठन नें अपना समर्थन उन्हें दिया, मेले से जानें से पहले वो मीडिया के सामने भरे मन से आये और कहा की मुग़ल काल मे भी इस तरह का कृत्य हिन्दुओ के साथ नही हुआ लेकिन दावा करने वाली एक हिन्दू सरकार नें ये कृत्य कर दिया उन्होंने अमित शाह के उस ब्यान पर भी कटाक्ष किया जिसमे उन्होंने कहा था की संतो का अपमान करने वाली सरकार सत्ता मे नही रहेगी शंकराचार्य नें ये उनका दोहरा चरित्र बताया की कहा की कहते कुछ हैं करते कुछ हैं,