पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी में नई दिशा
प्रयागराज में सफल डिवाइस क्लोजर, 7 वर्षीय देवांश को मिला नया जीवन
बाल हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में प्रयागराज ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। मुठ्ठीगंज निवासी 7 वर्षीय देवांश साहू के हृदय में मौजूद 14 मिमी के जन्मजात छेद (एएसडी) को अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव डिवाइस क्लोजर तकनीक से सफलतापूर्वक बंद किया गया। यह प्रक्रिया बिना ओपन हार्ट सर्जरी के की गई, जो शहर में किसी बाल रोगी में पहली बार संपन्न हुई।
परिजनों के अनुसार, देवांश की शारीरिक वृद्धि सामान्य रूप से नहीं हो पा रही थी। वह खेलकूद या शारीरिक गतिविधि के दौरान जल्दी थक जाता था और उसे बार-बार निमोनिया की शिकायत भी हो रही थी। जांच में हृदय में 14 मिमी का छेद पाया गया, जिसके बाद विशेषज्ञ टीम ने डिवाइस क्लोजर का निर्णय लिया।
कार्डियोलॉजिस्ट की टीम में डॉ. वैभव श्रीवास्तव, डॉ. ऋषिका पटेल, डॉ. विमल निषाद शामिल रहे, जबकि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट के रूप में डॉ. अनिल कुमार सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब तक एसआरएन अस्पताल में वयस्कों में जन्मजात हृदय रोग की समस्याओं का समाधान किया जाता रहा है, लेकिन पहली बार किसी बाल रोगी में इस प्रकार की इंटरवेंशनल डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई है।
समय पर उपचार बेहद जरूरी
डॉ. ऋषिका पटेल ने बताया कि शंट लीज़न जैसे एएसडी (ASD), वीएसडी (VSD) और पीडीए (PDA) का समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है। यदि इनका इलाज समय पर न किया जाए तो हार्ट फेल्योर और सायनोसिस (नीलिमा) जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। सायनोसिस की स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण त्वचा और होंठ नीले पड़ने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों में शारीरिक गतिविधि के दौरान जल्दी थकान महसूस होती है, व्यायाम के समय सांस लेने में तकलीफ हो सकती है तथा साथियों की तुलना में उनका शारीरिक विकास भी धीमा रह सकता है।
मंडल के बच्चों को मिलेगा लाभ
संस्थान के प्राचार्य डॉ. वी. के. पांडेय ने इस उपलब्धि को पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम बताया। उन्होंने कहा कि अब प्रयागराज मंडल के अनेक बच्चों को जटिल हृदय रोग के उपचार के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
चिकित्सकों के अनुसार, प्रक्रिया के बाद देवांश की स्थिति स्थिर है और वह शीघ्र ही सामान्य जीवन की ओर लौट सकेगा। यह उपलब्धि शहर में बाल हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलती है।