मंडलायुक्त की अध्यक्षता में प्रयागराज के नालों में विभिन्न तकनीकों से किए जा रहे शोधन के संबंध में समीक्षा बैठक संपन्न हुई।

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प्रयागराज: नदियों में छोड़े जा रहे पानी को और साफ बनाने हेतु किस तरह के अतिरिक्त तकनीकी हस्तक्षेप किए जा सकते हैं इस पर रेंडम सेंपलिंग कर जल निगम से आख्या मांगी।

नालों के पास बसे लोगों को नालों में कूड़ा डालने से रोकने हेतु एनजीओ की मदद से जागरूकता फैलाएं।

जो भी कार्यदाई संस्थाएं नालों के शोधन के कार्य से जुड़ी हुई हैं उनका दिसंबर माह तक के बकाए का भुगतान शीघ्र करें।

आगामी माघ मेले को श्रद्धालुओं एवं कल्पवसियों के लिए सुगम बनाने तथा नदियों के पानी को स्वच्छ रखने के दृष्टिगत मंडलायुक्त श्री संजय गोयल की अध्यक्षता में आज कार्यालय स्थित गांधी सभागार में प्रयागराज के नालों में विभिन्न तकनीकों से किए जा रहे शोधन के संबंध में समीक्षा बैठक संपन्न हुई जिसमें शोधन के पश्चात नदियों में छोड़े जा रहे पानी को और साफ बनाने हेतु किस तरह के अतिरिक्त तकनीकी हस्तक्षेप किए जा सकते हैं इस पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में मंडलायुक्त ने जल निगम के अधिकारियों को सभी 60 नालों में विभिन्न प्रकार के शोधन से साफ किए जा रहे पानी की रेंडम सैंपलिंग कराते हुए उनमें किस तरह के अतिरिक्त तकनीकी हस्तक्षेप से पानी को और बेहतर बनाया जा सकता है इस पर 2 दिन के अंदर उनके समक्ष आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस आख्या में किस तरह के अतिरिक्त रिमेडियेशन की आवश्यकता किन किन स्थानों पर है उसकी विस्तृत जानकारी उन स्थानों के लाटीट्यूड-लोंगिट्यूड के साथ मांगी गई है।

इसी क्रम में नालों के पास बसे लोगों को नालों में कूड़ा डालने से रोकने के दृष्टिगत उनमें जागरूकता फैलाने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य हेतु नगर आयुक्त श्री रवि रंजन को एनजीओ के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही जो भी कार्यदाई संस्थाएं नालों के शोधन के कार्य से जुड़ी हुई हैं उनका दिसंबर माह तक के बकाए का भुगतान शीघ्र करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

इसी क्रम में नालों के पानी की सेपलिंग कर गंदे पानी को नदियों में जाने से रोकने के दृष्टिगत पिछले दिनों बनाई गई प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, नगर निगम एवं गंगा प्रदूषण की संयुक्त टीम को विभिन्न स्थानों पर हफ्ते में दो बार की जा रही सेंपलिंग को बढ़ाकर अल्टरनेट डेज़ पर करने तथा उसकी रिपोर्ट मंडलायुक्त एवं मेला अधिकारी के साथ-साथ नगर आयुक्त को भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

वर्तमान में प्रयागराज नगर में कुल 76 नाले हैं जिसमें से 16 नाले स्थाई रूप से विभिन्न 7 एसटीपी से जुड़े हुए हैं। शेष 60 सालों में से 6 नालों में फाइटोरिमेडियेशन तकनीक द्वारा एवं 54 नालों में बायोरेमेडीएशन तकनीक द्वारा शोधन का कार्य नगर निगम प्रयागराज द्वारा किया जा रहा है। सभी एसटीपी अनटैप्ड नालों एवं गंगा व यमुना नदी की जल गुणवत्ता की जांच उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जा रही है।

एसटीपी की जांच सप्ताह में एक बार, अनटैप्ड नालों की जांच सप्ताह में दो बार तथा गंगा व यमुना नदी की प्रतिदिन जल गुणवत्ता की जांच उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जा रही है। पूर्व में टेस्टिंग 10 दिन में 1 बार की जा रही थी जो कि अब सप्ताह में तीन बार की जाएगी।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार एसटीपी वह अनटैप्ड नालों का शोधन मानक के अनुरूप है तथा गंगा व यमुना नदी की जल गुणवत्ता स्नान योग्य है।

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